किसी कस्बे में स्थित सैन्य उद्देश्य पर भी भेद, आनुपातिकता और सावधानी के नियम लागू होते हैं। नागरिकों के बीच उसकी मौजूदगी नागरिकों को निशाना बनाने योग्य नहीं बनाती और न ही हमलावर के दायित्व हटाती है। सैन्य कार्रवाइयों को ढाल देने के लिए नागरिकों की मौजूदगी का हमास द्वारा गैरकानूनी इस्तेमाल IHL का उल्लंघन है, लेकिन रक्षक का आचरण हमलावर के सैन्य लाभ को नहीं बढ़ाता और न ही नागरिकों की सुरक्षा रद्द करता है।
मानव ढाल हमलावर के दायित्व समाप्त नहीं करती
अतिरिक्त प्रोटोकॉल I का अनुच्छेद 51(7) सैन्य उद्देश्यों को ढाल देने के लिए नागरिकों के इस्तेमाल पर रोक लगाता है, और अनुच्छेद 51(8) स्पष्ट करता है कि ऐसे उल्लंघन किसी भी पक्ष को नागरिकों के प्रति उसके दायित्वों से मुक्त नहीं करते। ICRC भी अपने मानव ढालों पर प्रथागत IHL नियम में इस निषेध को मान्यता देता है। हमलावर को अब भी अपेक्षित नागरिक नुकसान का आकलन करना, लक्ष्य की पुष्टि करना और नुकसान घटाने के लिए व्यवहार्य कदम उठाना होगा।
किसी आबादी वाले इलाके के नीचे सुरंग या अन्य सैन्य उद्देश्य के मामले में कानूनी सवाल ठोस रहते हैं: किस सैन्य उद्देश्य पर हमला किया जा रहा है, किस आकस्मिक नुकसान की अपेक्षा है, किस लाभ का अनुमान है, और कौन-से व्यवहार्य तरीके या समय-चयन नागरिकों का खतरा घटा सकते हैं? केवल भूमिगत स्थिति से इनमें से किसी सवाल का जवाब नहीं मिलता।
अस्पतालों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है
चिकित्सा इकाइयों का सम्मान और संरक्षण किया जाना चाहिए। अतिरिक्त प्रोटोकॉल I के अनुच्छेद 13 के तहत, नागरिक चिकित्सा इकाइयाँ यह सुरक्षा केवल तभी खोती हैं जब उन्हें उनके मानवीय कार्य से बाहर शत्रु के लिए हानिकारक कृत्य करने में इस्तेमाल किया जाए; जहाँ उचित हो, सुरक्षा तभी समाप्त होती है जब उचित समय-सीमा वाली चेतावनी का पालन न किया गया हो। चौथे जिनेवा अभिसमय का अनुच्छेद 19 भी इसी तरह शत्रु के लिए हानिकारक कृत्यों और अनसुनी चेतावनी का उल्लेख करता है। केवल इसलिए कि घायल लड़ाकों का वहाँ इलाज हो रहा है, अस्पताल सुरक्षा नहीं खोता।
स्कूलों को वह अस्पताल-विशेष नियम नहीं मिलता जिसके तहत सुरक्षा समाप्त होने से पहले चेतावनी देना जरूरी है। अतिरिक्त प्रोटोकॉल I के अनुच्छेद 52 के तहत, स्कूल तब तक नागरिक वस्तु बने रहते हैं जब तक उनकी प्रकृति, स्थान, उद्देश्य या उपयोग उन्हें सैन्य कार्रवाई में प्रभावी योगदान न दे और उनका विनाश, कब्ज़ा या निष्प्रभावीकरण उस परिस्थिति में निश्चित सैन्य लाभ न दे। तब भी नागरिकों की सुरक्षा और आनुपातिकता के नियम लागू रहते हैं।
चेतावनी एक सावधानी है, अनुमति-पत्र नहीं
अनुच्छेद 57 उन हमलों से पहले प्रभावी चेतावनी देने की माँग करता है जिनसे नागरिक प्रभावित हो सकते हैं, जब तक परिस्थितियाँ इसकी अनुमति न दें। चेतावनी की प्रभावशीलता का आकलन परिस्थिति के अनुसार होना चाहिए, जिसमें यह भी शामिल है कि लोग उसे प्राप्त कर सकते हैं और उस पर कार्रवाई कर सकते हैं या नहीं। चेतावनी देने से वहाँ रह जाने वाले नागरिक वैध लक्ष्य नहीं बनते और न ही आनुपातिकता की कसौटी हटती है। यदि हमले से अत्यधिक अपेक्षित नुकसान हो सकता है, तो हमलावर को फिर भी उसे रद्द या स्थगित करना होगा।