अल-अथाविर गांव पर जानलेवा गोलाबारी
दक्षिण-पश्चिमी यमन में बुधवार, 4 नवंबर 2026 को एक रिहायशी मकान पर भारी गोलाबारी हुई, जिसमें एक ही परिवार के चार लोगों की जान चली गई और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और सरकारी मीडिया के अनुसार, यह घातक हमला ताइज़ प्रांत के दक्षिणी हैफ़ान ज़िले में स्थित अल-अथाविर गांव पर हुआ। स्थानीय अधिकारियों ने इस हमले के लिए नज़दीकी मोर्चों पर सक्रिय हूती मिलिशिया बलों को ज़िम्मेदार ठहराया है।
गोला सीधे गिरने से स्थानीय नागरिक अली अब्दुलहक़ अल-अथवारी का मकान पूरी तरह तबाह हो गया। यमन की आधिकारिक समाचार एजेंसी, Saba News Agency को दी गई आधिकारिक जानकारी में हैफ़ान ज़िले के महानिदेशक अली रावाह ने पुष्टि की कि धमाके में घर के अंदर मौजूद चार परिजनों की मौत हो गई। मृतकों में तीन नाबालिग भाई-बहन—सात वर्षीय मीरा, बारह वर्षीय सामा और तीन वर्षीय हय्यान—तथा उनकी पैंतीस वर्षीय बहन अबीर शामिल हैं।
हताहतों की स्थिति और स्थानीय नागरिकों पर प्रभाव
धमाके में परिवार के चार अन्य सदस्य विभिन्न स्तरों पर घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार घायलों में बीस वर्षीय अब्दो मरवान अब्दुलहक़, बारह वर्षीय ज़ैद रग़दान अली, तीन वर्षीय बुरहान मीसाक़ अब्दुलहक़ और दस वर्षीय अलिया अली अब्दुलहक़ शामिल हैं। ताइज़ गवर्नरेट सीज अफेयर्स ऑफिस ने बताया कि इस धमाके से आस-पास के कई मकानों को भारी संरचनात्मक क्षति पहुंची और ग्रामीणों में भारी दहशत फैल गई। घायल नागरिकों को बेहद दुर्गम वैकल्पिक रास्तों से निकालकर प्रांत के सरकार-नियंत्रित इलाक़ों में स्थित चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया गया।
ताइज़ के मोर्चों पर संघर्ष तेज़
यह जानलेवा हमला पूरे प्रांत में सैन्य टकराव में आई तेज़ी के बीच हुआ है। सैन्य प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नज़ीली के हवाले से Saba News Agency ने बताया कि यमनी सरकारी बल ताइज़ में कई रणनीतिक मोर्चों पर हूती हमलों को लगातार विफल कर रहे हैं, साथ ही पड़ोसी अल-जौफ़ में "डॉन ऑफ़ यमन" अभियान के तहत जवाबी हमले जारी रखे हुए हैं। Yemen Monitor की स्वतंत्र रिपोर्टिंग के अनुसार, आसपास की पहाड़ियों पर पीछे हटने के बाद हूती बलों ने रिहायशी बस्तियों पर मोर्चे के पार से गोलाबारी तेज़ कर दी थी।
हैफ़ान ज़िला दक्षिणी ताइज़ को पड़ोसी लहिज प्रांत से जोड़ने वाला एक रणनीतिक पहाड़ी गलियारा है, जिसके चलते इसके ग्रामीण इलाके अंधाधुंध तोपखाने के हमलों, बैलिस्टिक मिसाइलों और स्नाइपर हमलों का लगातार शिकार होते रहते हैं। 2015 के अंत से ही ताइज़ प्रांत हूती दस्तों की दमघोंटू सैन्य नाकेबंदी का सामना कर रहा है, जिसने आम नागरिकों की आवाजाही को गंभीर रूप से बाधित कर दिया है और मुख्य पारगमन मार्गों को बंद कर दिया है। जैसा कि Middle East Eye ने रिपोर्ट किया है, घनी आबादी वाले इलाक़ों पर भारी हथियारों के निरंतर प्रयोग से नागरिकों के हताहत होने का ख़तरा गंभीर रूप से बढ़ गया है, और इन दूरदराज़ पहाड़ी घाटियों में जारी दोनों तरफ़ की गोलीबारी का सबसे ज़्यादा शिकार बच्चे हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय क़ानून और नागरिकों का संरक्षण
ताइज़ के स्थानीय नागरिक संगठनों और मानवाधिकार पर्यवेक्षकों ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि रिहायशी घरों पर जानबूझकर या अंधाधुंध बमबारी करना अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का घोर उल्लंघन है। आबादी वाले ग्रामीण ज़िलों के बीच से गुज़रती युद्ध-सीमाओं के कारण, अल-अथाविर जैसे क्षेत्रों में रहने वाले परिवार एक तरफ़ इन जानलेवा हमलों के ख़तरे का सामना कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ जारी क्षेत्रीय घेराबंदी से पैदा हुई बुनियादी संसाधनों की भारी क़िल्लत से जूझ रहे हैं।